डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय | पहली भीम जयंती की अनसुनी कहानी (1928 पुणे)



 क्या आपको पता है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर की पहली जयंती कब और कैसे मनाई गई थी? यह सिर्फ एक जयंती नहीं थी, बल्कि सामाजिक क्रांति की शुरुआत थी।

Bhimrao Ramji Ambedkar का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। वे एक महान समाज सुधारक, अर्थशास्त्री, विधिवेत्ता और भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पकार थे।उन्होंने अपने जीवन में जाति भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ संघर्ष किया और दलितों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई।

🎓 📚 डॉ. अंबेडकर की शिक्षा और डिग्रियां

Bhimrao Ramji Ambedkar दुनिया के सबसे अधिक शिक्षित व्यक्तियों में से एक माने जाते हैं। उनके पास लगभग 32 डिग्रियां और सम्मान (Degrees & Honorary Degrees) थे।

B.A. – University of Bombay

M.A. – Columbia University

Ph.D. – Columbia University

D.Sc. (Economics) – London School of Economics

Bar-at-Law – Gray's Inn

🏅 विशेष सम्मान (Honorary Degrees):

LL.D. (Doctor of Laws)

D.Litt (Doctor of Literature)

 कहा जाता है कि बाबासाहेब ने भारत और विदेश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज़ से कई डिग्रियां हासिल कीं, जो उस समय किसी भी भारतीय के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी।

डॉ. अंबेडकर को भारतीय संविधान का “जनक” कहा जाता है।उन्होंने भारत को एक मजबूत, समानता आधारित और लोकतांत्रिक देश बनाने में अहम भूमिका निभाई।उनके द्वारा बनाए गए संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए।

बहुत कम लोग जानते हैं कि

डॉ. अंबेडकर की पहली जयंती 14 अप्रैल 1928 को मनाई गई थी (बाबा साहेब के 37वें जन्मदिन पर)।।यह आयोजन Khadki में हुआ था, जिसे आयोजित किया थाJanardan Sadashiv Ranpise ने।बाबासाहेब की प्रतिमा को हाथी की अंबारी पर रखा गया |एक भव्य जुलूस निकाला गया |जुलूस में ऊंटों का उपयोग किया गया Prabhat Film Company का सजा हुआ रथ शामिल था,यह उस समय एक बहुत ही क्रांतिकारी और प्रेरणादायक कदम था।यह पहल एक ऐसे समय में हुई जब बाबा साहेब अछूतों (दलितों) के अधिकारों के लिए अपना संघर्ष (जैसे महाड़ सत्याग्रह, 1927) तेज कर रहे थे। 

 जनार्दन रणपिसे कौन थे?

जनार्दन रणपिसे पुणे जिले के दलित समुदाय के पहले मैट्रिक पास व्यक्ति थे।उन्होंने सरकारी नौकरी करते हुए समाज सेवा का यह महान कार्य किया।उनकी पहल से शुरू हुई भीम जयंती आज पूरे भारत और दुनिया में बड़े स्तर पर मनाई जाती है।

आज भी हर साल 14 अप्रैल को पूरे देश में अंबेडकर जयंती बड़े सम्मान और गर्व के साथ मनाई जाती है।यह दिन हमें समानता, शिक्षा और अधिकारों के लिए संघर्ष की प्रेरणा देता है।

डॉ. अंबेडकर का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा, संघर्ष और आत्मविश्वास से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।उनकी पहली जयंती की कहानी हमें यह याद दिलाती है किछोटी शुरुआत भी एक दिन बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।

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