हमें अब रहने के लिए चाहिए दो पृथ्वियां
हाल ही में धरती की जनसंख्या से जुड़ा एक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र सामने आया है। यह 'एनवायरनमेंटल रिसर्च लेटर्स' में प्रकाशित हुई नई स्टडी है। सामने आई इस स्टडी ने दुनिया को हिला कर रख दिया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इंसान जिस रफ्तार से संसाधनों का उपयोग कर रहा है, उससे आज की जीवनशैली को बनाए रखने के लिए हमें एक नहीं, बल्कि 1.8 पृथ्वी की जरूरत है।जनसंख्या और औद्योगिकीकरण का प्रभाव ऑस्ट्रेलिया की फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कोरी ब्रैडशॉ के नेतृत्व में हुई इस रिसर्च में बताया गया है कि 1950 के बाद से जनसंख्या और औद्योगिकीकरण (Industrialization) में जो उछाल आया, उसने कुदरत का संतुलन बिगाड़ दिया है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
• पृथ्वी केवल 2.5 अरब लोगों को ही सुरक्षित और संतुलित तरीके से पाल सकती है।
• वर्तमान आबादी 8.3 अरब के पार जा चुकी है, जो वहन क्षमता से कहीं अधिक है।
भविष्य की चेतावनी: पारिस्थितिक कर्ज (Ecological Debt) स्टडी की मानें तो 2060 के दशक के अंत या 2070 तक वैश्विक जनसंख्या 12.4 अरब तक पहुँच सकती है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हम 'Ecological Debt' के तले दबते जा रहे हैं।
इसके कारण आने वाली संभावित आपदाएं:
1. जल संकट: पीने योग्य पानी की भारी कमी।
2. खाद्य असुरक्षा: बढ़ती आबादी के लिए भोजन जुटाना मुश्किल होगा।
3. वन्यजीवों का विनाश: जैव विविधता का तेजी से खत्म होना।
रिसर्च में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सिर्फ बढ़ती आबादी ही नहीं, बल्कि अमीर देशों में संसाधनों की अत्यधिक बर्बादी भी इस वैश्विक संकट के लिए उतनी ही जिम्मेदार है।

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